एकि गभीर वाणी एल घन मेघेर
Eki gobhir bani elo
प्रकृति
एकि गभीर वाणी एल घन मेघेर आड़ाल ध’रे
सकल आकाश आकुल क’रे॥
सेइ वाणीर परश लागे, नवीन
प्राणेर वाणी जागे,
हठाৎ दिके दिगन्तरे धरार हृदय़ ओठे भरे॥
से के वाँशि वाजिय़ेछिल कवे प्रथम सुरे
ताले,
प्राणेरे डाक दिय़ेछिल सुदुर आँधार आदिकाले।
तार वाँशिर ध्वनिखानि आज आषाढ़ दिल आनि,
सेइ अगोचरेर तरे आमार हृदय़ निल ह’रे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Eki gobhir baani elo ghano megher aaral dhore Sakol aakash aakul kore. Sei baanir parosh laage, nobin praaner baani jaage, Hotthat dike digantore dharar hridoy otthe bhore. Se ke bnaashi baajiyechhilo kabe prothom sure taale, Praanere daak diyechhilo sudur aandhar aadikale. Taar bnaashir dhownikhaani aaj aasharh dilo aani, Sei agocharer tore aamar hriday nilo hore.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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