ए मणिहार आमाय़ नाहि साजे
E monihar amay
पूजा
४८९
ए मणिहार आमाय़ नाहि साजे–
एरे परते गेले लागे,
एरे छिँड़ते गेले वाजे॥
कण्ठ ये रोध करे, सुर तो नाहि सरे–
ओइ दिके ये
मन पड़े रय़, मन लागे ना काजे॥
ताइ तो वसे आछि,
ए हार
तोमाय़ पराइ यदि तवेइ आमि वाँचि।
फुलमालार डोरे वरिय़ा लओ मोरे–
तोमार काछे
देखाइ ने मुख मणिमालार लाजे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
E monihaar aamay naahi saaje - Ere porte gele laage, ere chnirte gele baaje. Kantho je rodh kare, sur to naahi sare - Oi dike je mon pore roy, mon laage na kaaje. Taai to bose aachhi, E haar tomay parai jodi tabei aami bnaachi. Phulomaalar dore boriya lawo more - Tomar kaache dekhai ne mukh monimaalar laaje.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 24 August 1913(৮ ভাদ্র ১৩২০)
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