एसो गो ज्वेले दिय़े याओ प्रदीपखानि
Eso go jwele diye jao
प्रकृति
एसो गो ज्वेले दिय़े याओ
प्रदीपखानि
विजन घरेर कोणे, एसो गो।
नामिल श्रावणसन्ध्या, कालो छाय़ा
घनाय़ वने वने॥
आनो विस्मय़ मम निभृत प्रतीक्षाय़ यूथीमालिकार मृदु
गन्धे –
नीलवसन-अञ्चल-छाय़ा
सुखरजनी-सम मेलुक मने॥
हारिय़े गेछे मोर वाँशि,
आमि कोन् सुरे डाकि तोमारे।
पथ-चेय़े-थाका मोर दृष्टिखानि
शुनिते पाओ कि ताहार वाणी–
कम्पित वक्षेर परश मेले कि सजल समीरणे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Eso go, jwele diye jaao prodipokhaani Bijano gharer kone, eso go. Naamilo shrabonosondhya, kaalo chhaaya ghanay bone bone. Aano bismayo mamo nibhrito protikhaay juthimaalikar mridu gandhe - Nilobasono-aanchalo-chhaaya Sukhorajoni-samo meluko mone. Haariye gechhe mor bnaashi, Aami kon sure daaki tomare. Pathe cheye thaaka mor dristikhaani Shunite paao ki taahar baani - Kompito bokkher parosho mele ki sajolo somirane.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रकृति · 128(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- बोर्श(বোর্শ)
- राग
- इमन्-कल्यन(ইমন-কল্যাণ)
- ताल
- २-२(২-২)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- ऋतु
- बरसात(বর্ষা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ५८(স্বরবিতান ৫৮)
- स्वरलिपि
- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1939(১৩৪৬)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।