एसो, एसो, एसो हे वैशाख (एसो हे वैशाख)
Eso eso he boishakh
प्रकृति
एसो, एसो, एसो हे वैशाख।
तापसनिश्वासवाय़े मुमूर्षुरे दाओ उड़ाय़े,
वৎसरेर आवर्जना दूर हय़े याक॥
याक पुरातन स्मृति, याक भुले-याओय़ा गीति,
अश्रुवाष्प सुदूरे मिलाक॥
मुछे याक ग्लानि, घुचे याक जरा,
अग्निस्नाने शुचि होक धरा।
रसेर आवेशराशि शुष्क करि दाओ आसि,
आनो आनो आनो तव प्रलय़ेर शाँख।
माय़ार कुज्झटिजाल याक दूरे याक॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Eso, eso, eso hey boishakh. Taaposonishwasobaaye mumurshure daao uraaye, Botsorer aborjona dur hoye jaak. Jaak puraton smriti, jaak bhule jaawa geeti, Oshrubaashpo sudure milak. Muchhe jaak glaani, ghuche jaak jora, Ognisnaane suchi hok dhara. Rasero aabeshoraashi shushko kori daoa aasi, Aano aano aano tabo proloyero shaankh. Maayar kujjhotijal jaak dure jaak.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 4 March 1927(২০ ফাল্গুন ১৩৩৩)
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