हे क्षणिकेर अतिथि
He khaniker atithi
प्रेम
हे क्षणिकेर अतिथि, एले प्रभाते कारे चाहिय़ा झरा शेफालिर पथ वाहिय़ा॥ कोन् अमरार विरहिणीरे चाह नि फिरे, कार विषादेर शिशिरनीरे एले नाहिय़ा॥ ओगो अकरुण, की माय़ा जानो, मिलनछले विरह आनो। चलेछ पथिक आलोकयाने आँधार-पाने मनभुलानो मोहनताने गान गाहिय़ा॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hey khoniker otithi, Ele probhate kaare chaahiya Jhara sephalir patho baahiya. Kon amaraar birohinire chaahoni phire, Kaar bishader shishironire ele naahiya. Ogo akorun, ki maaya jaano, Milanochhale biraho aano. Cholechho pothik aalokojaane aandharo-paane Monbhulano mohanotaane gaan gaahiya.
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- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 1925(১৩৩২)
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