हे सन्न्यासी,
Himgiri phele niche
प्रकृति
हे सन्न्यासी, हिमगिरि फेले नीचे नेमे एले किसेर जन्य । कुन्दमालती करिछे मिनति, हओ प्रसन्न ॥ याहा-किछु स्नान विरस जीर्ण दिके दिके दिले करि विकीर्ण । विच्छेदभारे वनच्छाया करे विषण्ण— हओ प्रसन्न ॥ साजावे कि डाला, गाँथिवे कि माला मरणसत्रे ! ताइ उत्तरी निले भरि भरि शुकानो पत्रे ? धरणी ये तव ताओवे साथि प्रलयवेदना निल वुके पाति । रुद्र, एवारे वरवेशे तारे करो गो धन्य— हओ प्रसन्न ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hey sonnyasi, Himgiri phele niche neme ele kiser jonyo. Kundomaloti koriche minoti hawo prosanno. Jaaha kichhu mlaan biras jirno dike dike dile kori bikirno. Bichchhedbhaare bonochchhaayare kare bishanno - hawo prosanno. Saajabe ki daala, gnaathibe ki maala maronsatre ! Taai uttori nile bhori bhori shukano psatre ? Dharoni je tabo taandabe saathi prolayobedona nilo buke paati. Rudro, ebare barbeshe taare karo go dhonyo - hawo prosanno.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 5 March 1927(২১ ফাল্গুন ১৩৩৩)
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