हिय़ा काँपिछे सुखे कि दुखे सखी
Hiya kapichhe sukhe
प्रेम और प्रकृति
हिय़ा काँपिछे सुखे कि दुखे सखी,
केन नय़ने आसे वारि।
आजि प्रिय़तम आसिवे मोर घरे–
वलो की करिव आमि सखी।
देखा हले सखी, सेइ प्राणवँधुरे
की वलिव नाहि जानि।
से कि ना जानिवे, सखी, रय़ेछे या हृदय़े–
ना वुझे कि फिरे यावे सखी॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hiya knaapichhe sukhe ki dukhe sokhi, Keno nayone aase baari. Aaji priyotamo aasibe mor ghare – Balo ki koribo aami sokhi Dekha hole sokhi, sei praanobnodhure ki bolibo naahi jaani. Se ki na jaanibe, sokhi, royechhe ja hridaye – Na bujhe ki phire jaabe sokhi.
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ज्योतिरिन्द्रनाथ ठाकुर1849–1925Rabindranath's elder brother — playwright, composer and painter, a pioneer of written notation for Bengali song, and a formative presence in the young poet's life.Photographer unknown, before 1925 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1893(১৩০০)
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