हृदय़ आमार नाचेरे आजिके मय़ूरेर मत नाचेरे
Hridoy amar nache re
प्रकृति
हृदय़ आमार
नाचेरे आजिके मय़ूरेर मत नाचेरे।
शत वरनेर
भाव उच्छ्वास कलापेर मतो करेछे विकाश,
आकुल परान
आकाशे चाहिय़ा उल्लासे कारे याचे रे॥
ओगो, निर्जने वकुलशाखाय़ दोलाय़ के आजि दुलिछे, दोदुल दुलिछे।
झरके झरके
झरिछे वकुल, आँचल आकाशे हतेछे आकुल,
उड़िय़ा अलक
ढाकिछे पलक– कवरी खसिय़ा खुलिछे।
झरे
घनधारा नवपल्लवे, काँपिछे कानन झिल्लिर रवे–
तीर छापि
नदी कलकल्लोले एल पल्लिर काछे रे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hriday aamar naache re aajike moyurer mato naache re. Shato baroner bhaabo-uchchhas kalaaper mato korechhe bikash, Aakul paran aakashe chaahiya ullaase kaare jaache re. Ogo, nirjane bokuloshaakhay dolay ke aaji dulichhe, dodul dulichhe. Jharoke jharoke jhorichhe bokul, aanchal aakashe hotechhe aakul, Uriya alok dhaakichhe palok - kabori khosiya khulichhe. Jhare ghanodhaara nabopallobe, knaapichhe kaanon jhilliro rabe - Tir chhaapi nodi kalokallole elo polliro kaachhe re.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 3 May 1900(১৩০৭)
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