जानि जानि कोन् आदि काल हते
Jani jani kon adi
पूजा
२९७
जानि जानि कोन् आदि काल हते
भासाले आमारे जीवनेर स्रोते–
सहसा, हे प्रिय़, कत गृहे पथे
रेखे गेछ प्राणे कत हरषन॥
कतवार तुमि मेघेर आड़ाले
एमनि मधुर हासिय़ा दाँड़ाले,
अरुणकिरणे चरण वाड़ाले,
ललाटे राखिले शुभ परशन॥
सञ्चित हय़े आछे एइ चोखे
कत काले काले कत लोके लोके
कत नव नव आलोके आलोके
अरूपेर कत रूपदरशन।
कत युगे युगे केह नाहि जाने
भरिय़ा भरिय़ा उठेछे पराने
कत सुखे दुखे कत प्रेमे गाने
अमृतेर कत रसवरषन॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jaani jaani kon aadi kaal hote Bhaasale aamare jibaner srote - Sahosa, hey priyo, kato grihe pathe Rekhe gechho praane kato haroshan. Katobar tumi megher aarale Emoni modhur haasiya dnaarale, Oruno-kirane charon baarale, Lalate raakhile shubho paroshan. Sonchito hoye aachhe ei chokhe Kato kaale kaale kato loke loke Kato nabo nabo aaloke aaloke Aruper kato rupodaroshan. Kato juge juge keho naahi jaane Bhoriya bhoriya uttheche parane Kato sukhe dukhe kato preme gaane Amriter kato rasobaroshan.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 / भीमराव शास्त्री - रचनाकाल
- 1909(১৩১৬)
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