यतखन तुमि आमाय़ वसिय़े राख
Jatokhan tumi amay
पूजा
यतखन तुमि आमाय़ वसिय़े राख वाहिर-वाटे ततखन गानेर परे गान गेय़े मोर प्रहर काटे॥ यवे शुभक्षणे डाक पड़े सेइ भितर-सभार माझे ए गान लागवे वुझि काजे तोमार सुरेर रङेर रङिन नाटे॥ तोमार फागुनदिनेर वकुल चाँपा, श्रावणदिनेर केय़ा, ताइ देखे तो शुनि तोमार केमन ये तान दे'य़ा। आमि उतल प्राणे आकाश-पाने हृदय़खानि तुलि वीणाय़ वेँधेछि गानगुलि तोमार साँझ-सकालेर सुरेर ठाटे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jatokhan tumi aamay bosiye raakho baahir-baate Tatokhan gaaner pare gaan geye mor prohar kaate. Jabe shubhokhane daak pare sei bhitar-sabhar maajhe E gaan laagbe bujhi kaaje Tomar surer ranger rongin naate. Tomar phaagundiner bokul chnaapa, shrabandiner keya, Taai dekhe to shuni tomar kemon je taan deya. Aami utal praane aakash paane hridaykhani tuli Binay bnedhechhi gaanguli Tomar snaajh-sakaler surer tthaate.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 28(পূজা)
- उप-पर्याय
- गान(গান)
- राग
- किर्तन(কীর্তন)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन १५ (नबगीतिक) / २(স্বরবিতান ১৫ (নবগীতিকা) / ২)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।