येते येते एकला पथे निवेछे मोर वाति
Jete jete ekla pothe
पूजा
२०५
येते येते एकला पथे निवेछे मोर वाति।
झड़ एसेछे, ओरे, एवार झड़के पेलेम साथि॥
आकाशकोणे सर्वनेशे क्षणे क्षणे उठछे हेसे,
प्रलय़ आमार केशे वेशे करछे मातामाति॥
ये पथ दिय़े येतेछिलेम भुलिय़े दिल तारे,
आवार कोथा चलते हवे गभीर अन्धकारे।
वुझि वा एइ वज्ररवे नूतन पथेर वार्ता कवे–
कोन् पुरीते गिय़े तवे प्रभात हवे राति॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jete jete ekla pothe Nibechhe mor baati. Jhar esechhe, ore, ebar Jharke pelem saathi. Aakaashkone sarboneshe Khane khane utthechhe hese, Praloy aamar keshe beshe Korchhe maatamaati. Je path diye jetechhilem Bhuliye dilo taare, Aabar kotha chalte habe Gobhir andhakaare. Bujhi ba ei bajrorabe Nutan pather baarta kabe - Kon purite giye tabe Probhat hobe raati.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 205(পূজা)
- उप-पर्याय
- दुक्ख(দুক্খ)
- राग
- मल्हर(মল্হার)
- ताल
- झम्पक(ঝম্পক)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- संकलन
- गीतालि(গীতালি)
- स्थान
- सुरुल(সুরুল)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ११ (केतकि) / ४२(স্বরবিতান ১১ (কেতকী) / ৪২)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 11 September 1914(২৬ ভাদ্র ১৩২১)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।