जीवनेर किछु हल ना हाय়—
Jiboner kichhu holo na
वाल्मीकि प्रतिभा Valmiki Pratibha से · दृश्य 5
जीवनेर किछु हल ना हाय়— हल ना गो हल ना हाय় हाय় ! गहने गहने कत आर भ्रमिव, निराशार ए आँधारे ? शून्य हृदय় आर वहिते ये पारि ना, पारि ना गो पारि ना आर । की लय়े एखन धरिव जीवन, दिवसरजनी चलिय়ा याय়— दिवसरजनी चलिय়ा याय়— कत की करिव वलि कत उठे वासना, की करिव जानि ना गो ! सहचर छिल यारा, त्येजिय়ा गेल तारा । धनुर्वाण त्येजेछि, कोनो आर नाहि काज— की करि की करि वलि हाहा करि भ्रमि गो— की करिव जानि ना ये !
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jibaner kichhu holo na haay - Holo na go holo na, haay haay. Gahone gahone kato aar bhromibo nirashar e aandhare. Shunyo hriday aar bohite je paari naa, Paari na go, paari naa aar. Ki loye ekhon dhoribo jiban, dibaso-rajoni choliya jaay - Dibaso-rajoni choliya jaay - Kato ki koribo bali kato utthe baasona, Ki koribo jaani naa go. Sahochar chhilo jaara tyajiya gelo taara; Dhanurbaan tyejechhi, Kono aar naahi kaaj - Ki kori ki kori boli, haaha kori bhromi go - Ki koribo jaani na je.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1880(১২৮৭)
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