কখন বসন্ত গেল
Kakhon je basanta gelo
Prem
कखन वसन्त गेल, एवार हल ना गान। कखन वकुलमूल छेय़ेछिल झरा फुल, कखन ये फुल-फोटा हय़े गेल अवसान॥ एवार वसन्ते कि रे युँथिगुलि जागे नि रे– अलिकुल गुञ्जरिय़ा करे नि कि मधुपान। एवार कि समीरण जागाय़ नि फुलवन– साड़ा दिय़े गेल ना तो, चले गेल म्रिय़माण॥ वसन्तेर शेष राते एसेछि ये शून्य हाते– एवार गाँथि नि माला, की तोमारे करि दान। काँदिछे नीरव वाँशि, अधरे मिलाय़ हासि– तोमार नय़ने भासे छलोछलो अभिमान॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kakhon je basanto gelo, ebar holo na gaan. Kakhon bokulmul chheyechhilo jhara phul, Kakhon je phul-phota hoye gelo abosan. Ebar basonte kire jnuthiguli jaage ni re - Olikul gunjariya kare ni ki modhupaan. Ebar ki somiran jaagay ni phulobon - Saara diye gelo na to, chole gelo mriomaan. Basonter shesh raate esechhi je shunyo haate - Ebar gnaathi ni maala, ki tomare kori daan. Knaadichhe nirabo bnaashi, adhore milay haasi - Tomar nayone bhaase chhalochhalo obhiman.
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- संकलन
- Kori O Komal
- स्वरबितान खण्ड
- 32
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani / Dinendranath Tagore
- रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
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