के दिल आवार आघात आमार दुय़ारे
Ke dilo abar aghat
प्रेम
के दिल आवार आघात आमार दुय़ारे।
ए निशीथकाले के आसि दाँड़ाले, खुँजिते आसिले काहारे॥
वहुकाल हल
वसन्तदिन एसेछिल एक अतिथि नवीन
आकुल जीवन करिल मगन अकूल पुलकपाथारे॥
आजि ए वरषा निविड़तिमिर, झरोझरो जल, जीर्ण कुटीर–
वादलेर वाय़े प्रदीप निवाय़े जेगे वसे आछि एका रे।
अतिथि अजाना, तव गीतसुर लागितेछे काने भीषणमधुर–
भावितेछि
मने याव तव सने अचेना असीम आँधारे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ke dilo aabar aaghat aamar duware. E nishithokaale ke aasi dnaarale khunjite aasile kaahare. Bohukal holo basontodin esechhilo ek otithi nobin, Aakulo jibano korilo magon akul pulako paathare. Aaji e barosha nibiro timiro, jharojharo jal jirno kutir - Baadoler baaye prodip nibaaye jege bose aachhi eka re. Otithi ajana tabo gitosuro laagitechhe kaane bhisanomodhuro - Bhaabitechhi mone jaabo tabo sane achena asimo aandhare.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 154(প্রেম)
- उप-पर्याय
- प्रेम्-बोइचित्र(প্রেম্-বোইচিত্র)
- राग
- केदर(কেদারা)
- ताल
- कहर्व(কাহারবা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ११ (केतकि)(স্বরবিতান ১১ (কেতকী))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1895(১৩০২)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।