কোন্ আলোতে প্রাণের প্রদীপ
Kon alote praner pradip
Puja
५५७
कोन् आलोते प्राणेर प्रदीप ज्वालिय़े तुमि धराय़ आस–
साधक ओगो, प्रेमिक ओगो,
पागल ओगो, धराय़ आस॥
एइ अकूल संसारे
दुःख आघात तोमार प्राणे वीणा झङ्कारे।
घोर विपद-माझे
कोन् जननीर मुखेर हासि देखिय़ा हासो॥
तुमि काहार सन्धाने
सकल सुखे आगुन ज्वेले वेड़ाओ के जाने!
एमन व्याकुल क’रे
के तोमारे काँदाय़ यारे भालोवास॥
तोमार भावना किछु नाइ–
के ये तोमार साथेर साथि भावि मने ताइ।
तुमि मरण भुले
कोन्
अनन्त प्राणसागरे आनन्दे भास॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kon aalote praaner prodip jwaaliye tumi dharay aaso - Saadhok ogo, premik ogo, Paagol ogo, dhoray aaso. Ei akul songsaare Dukho aaghat tomar praane bina jhankare. Ghor bipad-maajhe Kon janonir mukher haasi dekhiya haaso. Tumi kaahar sandhane Sakol sukhe aagun jwele berao ke jaane. Emon byakul kore Ke tomare knaaday jaare bhaalobaso. Tomar bhaabna kichhu naai - Ke je tomar saather saathi bhaabi mone taai. Tumi maron bhule Kon ananto praansaagore aanonde bhaaso.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 557(পূজা)
- उप-पर्याय
- Baul
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- संकलन
- Geetanjali
- स्वरबितान खण्ड
- 38
- स्वरलिपि
- Surendranath Bandopadhyay / Bhimrao Shastri
- रचनाकाल
- 1 January 1910(১৭ পৌষ ১৩১৬)
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