कोन् गहन अरण्ये तारे
Kon gahano aranye tare
प्रेम
कोन् गहन अरण्ये तारे एलेम
हाराय़े
कोन् दूर जनमेर कोन्
स्मृतिविस्मृतिछाय़े॥
आज आलो-आँधारे
कखन्-वुझि देखि, कखन् देखि ना तारे–
कोन् मिलनसुखेर स्वपनसागर एल पाराय़े॥
धरा-अधरार माझे
छाय़ानटेर रागिणीते आमार वाँशि
वाजे।
वकुलतलाय़ छाय़ार नाचन फुलेर गन्धे मिशे
जानि ने मन पागल करे किसे।
कोन् नटिनीर घूर्णि-आँचल लागे आमार गाय़े॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kon gahano aronnye taare elem haaraye Kon dur janomer kon srmitibismritichhaye. Aaj aalo-aandhare Kakhon-bujhi dekhi kakhon dekhi na taare - Kon milanosukher swaponsaagor elo paaraye. Dhara-adharar maajhe Chhaayanater raaginite aamar bnaashi baaje. Bokultalai chhaayar naachon phuler gandhe mishe Jaani ne mon paagol kare kise. Kon notinir ghurni-aanchal laage aamar gaaye.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1934(১৩৪১)
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