কোন্ খেপা শ্রাবণ ছুটে এল
Kon khepa shrabon
Prakriti
कोन् खेपा श्रावण छुटे एल आश्विनेरइ आङिनाय़।
दुलिय़े जटा घनघटा पागल हाओय़ार गान से गाय़॥
माठे माठे पुलक लागे छय़ानटेर नृत्यरागे,
शरৎ-रविर सोनार आलो उदास हय़े मिलिय़े याय़॥
की कथा से वलते एल भरा क्षेतेर
काने काने।
लुटिय़े-पड़ा किसेर काँदन उठेछे आज नवीन धाने।
मेघे अधीर आकाश
केन डाना-मेला गरुड़ येन–
पथ-भोला एइ पथिक एसे पथेर वेदन आनल धराय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kon khepa shraabon chhute elo aashwineri aanginaay. Duliye jata ghanoghata paagol haawar gaan se gaay. Maathe maathe pulok jaage chhaayanater nrityoraage, Sharot robir sonar aalo udaas hoye miliye jaay. Ki kotha se bolte elo bhora kheter kaane kaane Lutiye pora kiser knaadon utthechhe aaj nobin dhaane. Meghe aadhir aakash keno daana mela gorur jeno - Path bhola ek pothik ese pather bedon aanlo dhoray.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prakriti · 155(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- Sharat
- राग
- Kedara(কেদারা)
- ताल
- Dadra(দাদরা)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Sharat(শরৎ)
- संकलन
- Probasi
- प्रकाशित
- Probasi
- स्थान
- Shantiniketan
- स्वरबितान खण्ड
- 11 (Ketaki) / 16 (Geetapanchashika)
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore / Jyotirindranath Tagore
- रचनाकाल
- September 1915(আশ্বিন ১৩২২)
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