माटिर प्रदीपखानि आछे
Matir pradipkhani achhe
विचित्र
माटिर प्रदीपखानि आछे माटिर घरेर कोले, सन्ध्यातारा ताकाय़ तारि आलो देखवे व’ले॥ सेइ आलोटि निमेषहत प्रिय़ार व्याकुल चाओय़ार मतो, सेइ आलोटि माय़ेर प्राणेर भय़ेर मतो दोले॥ सेइ आलोटि नेवे ज्वले श्यामल धरार हृदय़तले, सेइ आलोटि चपल हाओय़ाय़ व्यथाय़ काँपे पले पले। नामल सन्ध्यातारार वाणी आकाश हते आशिस आनि, अमरशिखा आकुल हल मर्तशिखाय़ उठते ज्व’ले॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Maatir prodipkhaani aachhe maatir gharer kole, Sondhyataara taakay taari aalo dekhbe bole. Sei aaloti nimeshohato priyar byakul chaawar mato, Sei aaloti maayer praaner bhayer mato dole. Sei aaloti nebe jwale shyamolo dharar hridayotale, Sei aaloti chapolo haaway byathay knaape pale pale. Naamlo sondhyataarar baani aakash hote aashiso aani, Amoroshikha aakul holo martoshikhay utthte jwole.
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- पर्याय
- विचित्र · 97(বিচিত্র)
- राग
- बौल्-सुर(বাউল-সুর)
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- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ३४ (गीतबिथिक)(স্বরবিতান ৩৪ (গীতবীথিকা))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1918(১৩২৫)
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