मध्यदिने यवे गान वन्ध करे पाखि
Madhyadine jobe gan
प्रकृति
मध्यदिने यवे गान वन्ध करे पाखि, हे राखाल, वेणु तव वाजाओ एकाकी॥ प्रान्तरप्रान्तेर कोणे रुद्र वसि ताइ शोने मधुरेर-स्वप्नावेशे-ध्यानमगन-आँखि– हे राखाल, वेणु यवे वाजाओ एकाकी॥ सहसा उच्छ्वसि उठे भरिय़ा आकाश तृषातप्त विरहेर निरुद्ध निश्वास। अम्वरप्रान्ते ये दूरे डम्वरु गम्भीर सुरे जागाय़ विद्युतछन्दे आसन्न वैशाखी– हे राखाल, वेणु यवे वाजाओ एकाकी॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Modhyodine jabe gaan bandho kare paakhi, Hey raakhal, benu tabo baajao ekaki. Praantaropraanter kone rudro bosi taai shone, Modhurer-swapnobese-dhyanomagono aankhi - Hey raakhal, benu tabo baajao ekaki. Sahosa uchhwosi utthe bhoriya aakash Trishatapto biraher niruddho nihshwas. Aambaropraante je dure dambru gombhir sure Jaagay biddutochhande aasanno boishakhi - Hey raakhal, benu tabo baajao ekaki.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 4 March 1927(২০ ফাল্গুন ১৩৩৩)
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