महाराज, एकि साजे एले हृदय़पुरमाझे
Maharaj eki saje ele
पूजा
५२२ महाराज, एकि साजे एले हृदय़पुरमाझे! चरणतले कोटि शशी सूर्य मरे लाजे॥ गर्व सव टुटिय़ा मूर्छि पड़े लुटिय़ा, सकल मम देह मन वीणासम वाजे॥ एकि पुलकवेदना वहिछे मधुवाय़े! कानने यत पुष्प छिल मिलिल तव पाय़े। पलक नाहि नय़ने, हेरि ना किछु भुवने– निरखि शुधु अन्तरे सुन्दर विराजे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Maharajo eki saaje ele hridoyopuromaajhe ! Charonotale koti shoshi surjyo mare laaje. Garbo sabo tutiya murchhi pare lutiya, Sakolo mamo deho mono binasamo baaje. Eki pulakobedona bohichhe modhubaaye ! Kaanone jato pushpo chhilo mililo tabo paaye Palok naahi nayone, heri na kichhu bhubane - Nirokhi shudhu antare sundaro biraje.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1909(১৩১৬)
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