मम मन-उपवने चले अभिसारे
Mamo mon upabone
प्रकृति
मम मन-उपवने चले अभिसारे आँधार राते विरहिणी।
रक्ते तारि नूपुर वाजे रिनिरिनि॥
दुरु दुरु करे
हिय़ा, मेघ ओठे गरजिय़ा,
झिल्लि झनके झिनिझिनि॥
मम मन-उपवने झरे वारिधारा, गगने नाहि शशीतारा।
विजुलिर चमकने मिले आलो क्षणे
क्षणे,
क्षणे क्षणे पथ भोले
उदासिनी॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Mamo mono upobone chale obhisare aandhar raate birohini. Rakte taari nupur baaje rinirini. Duru duru kare hiya, megh otthe garojiya, Jhilli jhanoke jhinijhini. Mamo mono upobone jhare baaridhara, gagone naahi shoshitaara. Bijulir chamokane mile aalo khane khane, Khane khane path bhole udaasini.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1934(১৩৪১)
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