মন মোর মেঘের সঙ্গী
Mon mor megher songi
Prakriti
मन मोर मेघेर सङ्गी,
उड़े चले दिग्दिगन्तेर पाने
नि:सीम शून्ये श्रावणवर्षणसङ्गीते
रिमिझिम रिमिझिम रिमिझिम॥
मन मोर हंसवलाकार पाखाय़ याय़ उड़े
क्वचिৎ क्वचिৎ चकित तड़ित-आलोके।
झञ्झनमञ्जीर वाजाय़ झञ्झा रुद्र
आनन्दे।
कलो कलो कलमन्द्रे निर्झरिणी
डाक देय़ प्रलय़-आहवाने॥
वाय़ु वहे पूर्वसमुद्र हते
उच्छल छलो छलो तटिनीतरङ्गे।
मन मोर धाय़ तारि मत्त प्रवाहे
ताल-तमाल-अरण्ये
क्षुव्ध शाखार आन्दोलने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Mon mor megher songi, Ure chale digdigantero paane Nihsimo shunye shraabonobarshanosongite Rimijhim rimijhim rimijhim. Mono mor hangsobalakar paakhay jaay ure Kochito kochito chokito torito-aaloke. Jhanjhanomonjiro baajay jhanjha rudro aanonde. Kalo-kalo kalomondre nirjhorini Dsak dey prolay-aahwaane. Baayu bahe purbosomudro hote Uchchhalo chhalo-chhalo totinitaronge. Mono mor dhaay taari matto probahe Taal-tamalo-aronye Khubdho shaakhar aandolane.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prakriti · 122(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- Borsha
- राग
- Malhar
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Barsha(বর্ষা)
- स्वरबितान खण्ड
- 53
- स्वरलिपि
- Shailajaranjan Majumdar
- रचनाकाल
- 13 September 1938(২৮ ভাদ্র ১৩৪৫)
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