मोर वीणा ओठे कोन् सुरे वाजि
Mor bina othe kon sure
प्रकृति
मोर वीणा ओठे कोन् सुरे वाजि
कोन नव चञ्चल छन्दे।
मम अन्तर कम्पित आजि
निखिलेर हृदय़स्पन्दे॥
आसे कोन्
तरुण अशान्त, उड़े वसनाञ्चलप्रान्त–
आलोकेर
नृत्ये वनान्त मुखरित अधीर आनन्दे॥
अम्वरप्राङ्गणमाझे नि:स्वर मञ्जीर गुञ्जे।
अश्रुत सेइ
ताले वाजे करतालि पल्लवपुञ्जे।
कार
पदपरशन-आशा तृणे तृणे अर्पिल भाषा–
समीरण
वन्धनहारा उन्मन कोन् वनगन्धे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Mor bina otthe kon sure baaji kon nabo chanchalo chhande. Mamo antoro kompito aaji nikhilero hridayospande. Aase kon taruno aashanto, ure basonanchalopraanto, Aalokero nritte bananto mukhorito adhiro aanonde. Ambaropraangonomaajhe nihsaro monjiro gunje. Ashruto sei taale baaje karotaali pallabopunje. Kaar padoparoshano aasha trine trine orpilo bhaasa, Somirano bandhanohaara unmano kon bonogandhe.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1919(১৩২৬)
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