निद्राहारा रातेर ए गान
Nidrahara rater e gan
प्रेम
१२
निद्राहारा रातेर ए गान वाँधव
आमि केमन सुरे।
कोन् रजनीगन्धा हते आनव से तान
कन्ठे पूरे॥
सुरेर काङाल आमार
व्यथा छाय़ार काङाल रौद्र यथा
साँझ-सकाले वनेर पथे उदास हय़े वेड़ाय़ घुरे॥
ओगो, से कोन् विहान वेलाय़ एइ
पथे कार पाय़ेर तले
नाम-ना-जाना तृणकुसुम शिउरेछिल
शिशिरजले।
अलके तार एकटि गुछि करवीफुल रक्तरुचि,
नय़न करे की फुल चय़न नील गगने दूरे दूरे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Nidrahara raater e gaan bnaadhbo aami kemon sure. Kon rajonigandha hote aanbo se taan kanthe pure. Surer kaangal aamar byatha chhaayar kaangal roudra jatha Snaajh-sakaale boner pathe udaas hoye beray ghure. Ogo, se kon bihan belay ei pathe kaar paayer tale Naam-na-jaana trinokusum shiurechhilo shishirjale. Aloke taar ekti guchhi karobiphul raktoruchi, Nayon kare ki phul chayon nil gagone dure dure.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 27 March 1922(১৩ চৈত্র ১৩২৮)
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