নীল- অঞ্জনঘন পুঞ্জছায়ায় সম্বৃত অম্বর হে গম্ভীর
Nil anjanoghano punjochhayay
Prakriti
नील-
अञ्जनघन पुञ्जछाय़ाय़ सम्वृत अम्वर हे
गम्भीर!
वनलक्ष्मीर कम्पित काय़, चञ्चल अन्तर–
झङ्कृत
तार झिल्लिर मञ्जीर हे गम्भीर॥
वर्षणगीत
हल मुखरित मेघमन्द्रित छन्दे,
कदम्ववन
गभीर मगन आनन्दघन गन्धे–
नन्दित तव
उৎसवमन्दिर हे गम्भीर॥
दहनशय़ने
तप्त धरणी पड़ेछिल पिपासार्ता,
पाठाले
ताहारे इन्द्रलोकेर अमृतवारिर वार्ता।
माटिर
कठिन वाधा हल क्षीण, दिके दिके हल दीर्ण–
नव-अङ्कुर-जय़पताकाय़ धरातल समाकीर्ण–
छिन्न
हय़ेछे वन्धन वन्दीर हे गम्भीर॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Nil anjano ghano punjochhaayay sambrito ambar hey gombhir ! Bonolokkhir kompito kaay chanchalo antor - Jhonkrito taar jilliro monjir hey gombhir. Barshonogito holo mukhorito meghomondrito chhande, Kadambobono gobhiro magono aanondoghano gandhe - Nandito tabo utsabomondir hey gombhir. Dahonoshayone tapto dharoni porechhilo pipasarta, Paathale taahare indroloker amritobaarir baarta. Maatir kothin baadha holo khin, dike dike holo dirno - Nabo ankuro-joyopatakay dharatol somakirno - Chinno hoyechhe bandhano bondir he gombhir.
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- पर्याय
- Prakriti · 55(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
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- Megh-Malhar
- ताल
- Dadra(দাদরা)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Barsha(বর্ষা)
- प्रकाशित
- Probasi
- स्वरबितान खण्ड
- 3
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore
- रचनाकाल
- 10 August 1929(২৬ শ্রাবণ ১৩৩৬)
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