नील दिगन्ते ओइ फुलेर आगुन लागल
Nil digonte oi phuler
प्रकृति
नील दिगन्ते ओइ फुलेर आगुन लागल। वसन्ते सौरभेर शिखा जागल॥ आकाशेर लागे धाँधा रविर आलो ओइ कि वाँधा॥ वुझि धरार काछे आपनाके से मागल। सर्षेक्षेते फुल हय़े ताइ जागल॥ नील दिगन्ते मोर वेदनखानि लागल। अनेक कालेर मनेर कथा जागल। एल आमार हारिय़े-याओय़ा कोन् फागुनेर पागल हाओय़ा। वुझि एइ फागुने आपनाके से मागल। सर्षेक्षेते ढेउ हय़े ताइ जागल॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Nil digante oi phuler aagun laaglo, Basonte sourabher shikha jaaglo. Aakasher laage dhnaadha robir aalo oi ki bnaadha. Bujhi dharar kaachhe aapnake se maaglo, Sorshekhete phul hoye taai jaaglo. Nil digante mor bedankhani laaglo, Anek kaaler moner katha jaaglo. Ele aamar haariye jaawa kon phaaguner paagol haawa. Bujhi ei phaagune aapnake se maaglo, Sorshekhete dheu hoye taai jaaglo.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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