निशीथे की कय़े गेल मने
Nishithe ki koye gelo
प्रेम
निशीथे की
कय़े गेल मने की जानि, की जानि।
से कि
घुमे, से कि जागरणे की जानि, की जानि॥
नाना काजे
नाना नाना मते फिरि घरे, फिरि पथे–
से कथा कि
अगोचरे वाजे क्षणे क्षणे। की जानि, की जानि॥
से कथा कि अकारणे व्यथिछे
हृदय़, एकि भय़, एकि जय़।
से कथा कि काने काने वारे वारे
कय़ ‘आर नय़’ ‘आर नय़’।
से कथा कि
नाना सुरे वले मोरे ‘चलो दूरे’–
से कि वाजे
वुके मम, वाजे कि गगने। की जानि, की जानि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Nishithe ki koye gelo mone ki jaani ki jaani. Se ki ghum se ki jaagorane, ki jaani ki jaani. Naana kaaje naana mate phiri ghare, phiri pathe - Se katha ki agochare baaje khane khane. Ki jaani, ki jaani. Se katha ki akaarone byathichhe hriday, eki bhay, eki joy. Se katha ki kaane kaane baare baare koy 'aar noy' 'aar noy'. Se katha ki naana sure bale more 'chalo dure' - Se ki baaje buke mamo, baaje ki gogane. Ki jaani, ki jaani.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1926(১৩৩৩)
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