निशीथरातेर प्राण
Nishithorater pran
प्रकृति
निशीथरातेर प्राण कोन् सुधा ये चाँदेर आलोय़ आज करेछे पान॥ मनेर सुखे ताइ आज गोपन किछु नाइ, आँधार-ढाका भेङे फेले सव करेछे दान॥ दखिन-हाओय़ाय़ तार सव खुलेछे द्वार। तारि निमन्त्रणे आजि फिरि वने वने सङ्गे करे एनेछि एइ रात-जागा मोर गान॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Nishotoraater praan Kon sudha je chnaader aaloy aaj korechhe paan. Moner sukhe taai aaj gopan kichhu naai, Aandhar dhaaka bhenge phele sob korechhe daan. Dokhin haaway taar sob khulechhe dwaar. Taari nimantrane aaji phiri bone bone, Songe kore enechhi ei Raat-jaaga mor gaan.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1923(১৩৩০)
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