ओइ देख् पश्चिमे मेघ घनालो
Oi dekh poschime megh
चण्डालिका Chandalika से · दृश्य 3
ओइ देख् पश्चिमे मेघ घनालो, मन्त्र खाटवे मा, खाटवे— उड়े यावे शुष्क साधना सन्न्यासीर शुकनो पातार मतन । निववे वाति, पथ हवे अन्धकार, झड়े-वासा-भाङा पाखि घुरे घुरे पड়वे एसे मोर द्वारे । दुरु दुरु करे मोर वक्ष, मनेर माझे झिलिक दितेछे विजुलि । दूरे येन फेनिय়े उठेछे समुद्र— तल नेइ, कूल नेइ तार । मन्त्र खाटवे मा, खाटवे ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Oi dekh poschime megh ghanalo, Montro khaatbe ma, khaatbe - Ure jaabe shuska saadhona sonnyasir Shukno paatar moton. Nibbe baati, path habe andhokaar, Jhare-baasa-bhaanga paakhi Ghure ghure porbe ese mor dwaare. Duru duru kare mor bokkho, Moner maajhe jhilik ditechhe bijuli. Dure jeno pheniye utthechhe somudro - Tal nei, kul nei taar. Montro khaatbe ma, khaatbe.
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- चण्डालिका · 15(চণ্ডালিকা)
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years. / दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1938(১৩৪৫)
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