ओरे माझि, ओरे आमार मानवजन्मतरीर माझि
Ore majhi ore amar
विचित्र
ओरे माझि, ओरे आमार मानवजन्मतरीर माझि, शुनते कि पास दूरेर थेके पारेर वाँशि उठछे वाजि॥ तरी कि तोर दिनेर शेषे ठेकवे एवार घाटे एसे। सेथाय़ सन्ध्या-अन्धकारे देय़ कि देखा प्रदीपराजि॥ येन आमार लागे मने मन्द-मधुर एइ पवने सिन्धुपारेर हासिटि कार आँधार वेय़े आसछे आजि। आसार वेलाय़ कुसुमगुलि किछु एनेछिलेम तुलि, येगुलि तार नवीन आछे एइ वेला ने साजिय़े साजि॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ore maajhi ore aamar manobjanmotorir maajhi, Shunte ki paas durer theke paarer bnaashi utthechhe baaji. Tori ki tor diner sheshe tthekbe ebaar ghaate ese. Sethay sondha andhokare dey ki dekha prodipraaji. Jeno aamar laage mone mondo-modhur ei pabone Sindhupaarer haasiti kaar aandhar beye aaschhe aaji. Aasar belay kusumguli kichhu enechhilem tuli, Jeguli taar nobin aachhe ei bela ne saajiye saaji.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 2 August 1910(১৮ শ্রাবণ ১৩১৭)
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