फिराय़ो ना मुखखानि
Phirayo na mukhokhani
प्रेम और प्रकृति
फिराय़ो ना मुखखानि,
फिराय़ो ना मुखखानि रानी ओगो रानी॥
भ्रूभङ्गतरङ्ग केन आजि सुनय़नी!
हासिराशि गेछे
भासि, कोन् दुखे सुधामुखे नाहि वाणी॥
आमारे मगन
करो तोमार मधुर करपरशे
सुधासरसे।
प्राण मन पुरिय़ा दाओ निविड़ हरषे।
हेरो शशीसुशोभन, सजनी,
सुन्दर रजनी।
तृषितमधुपसम कातर हृदय़ मम–
कोन् प्राणे आजि फिरावे तारे पाषाणी॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Phiraayo na mukhokhani, Phiraayo na mukhkhani raani ogo raani. Bhrubhangotarongo keno aaji sunayoni ! Haasiraashi gechhe bhaasi, kon dukhe sudhamukhe naahi baani. Aamare magon karo tomar modhur karoparoshe Shudharase. Praano mon puriya daao nibiro haroshe. Hero shoshisushobhon, sajoni, Sundar rajoni. Trishitomodhuposamo kator hriday mamo – Kon praane aaji phirabe taare paashani.
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ज्योतिरिन्द्रनाथ ठाकुर1849–1925Rabindranath's elder brother — playwright, composer and painter, a pioneer of written notation for Bengali song, and a formative presence in the young poet's life.Photographer unknown, before 1925 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1893(১৩০০)
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