फुलटि झरे गेछे रे
Phulti jhore gechhe re
प्रेम और प्रकृति
फुलटि झरे
गेछे रे।
वुझि से उषार
आलो उषार देशे चले गेछे॥
शुधु से पाखिटि मुदिय़ा आँखिटि
सारादिन एकला
वसे गान
गाहितेछे॥
प्रतिदिन देखत
यारे आर तो तारे देखते ना पाय़–
तवु से नित्यि आसे
गाछेर शाखे, सेइखेनेतेइ वसे थाके,
सारा
दिन सेइ गानटि
गाय़, सन्ध्या हले कोथाय़ चले याय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Phulti jhare gechhe re. Bujhi se ushaar aalo ushaar deshe chole gechhe. Shudhu se pakhiti mudiya aankhiti Saaradin ekla bose gaan gaahitechhe. Protidin dekhto jaare aar to taare dekhte na paay – Tobu se nitti aase gaachher shaakhe, seikhenetei bose theake, Saaradin sei gaanti gaay sondhya hole kothaay chole jaay.
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इंदिरा देवी चौधरनी1873–1960Rabindranath's niece — scholar, translator and musician, who set down a great many of his songs in notation.Photographer unknown, c. 1890 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1885(১২৯২)
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