पथिक मेघेर दल जोटे ओइ
Pothik megher dol
प्रकृति
पथिक
मेघेर दल जोटे ओइ श्रावणगगन-अङ्गने।
शोन् शोन् रे मन रे
आमार, उधाओ हय़े निरुद्देशेर सङ्ग ने॥
दिक्-हारानो
दु:साहसे सकल वाँधन पड़ुक खसे,
किसेर वाधा घरेर कोणेर
शासनसीमा-लङ्घने॥
वेदना तोर विजुलिशिखा ज्वलुक अन्तरे।
सर्वनाशेर करिस साधन वज्रमन्तरे।
अजानाते करवि गाहन, झड़ से पथेर
हवे वाहन–
शेष करे दिस आपनारे तुइ प्रलय़
रातेर त्रन्दने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Pothik megher dal jote oi shraabongagono-angone. Shon shon re, mon re aamar, udhaao hoye niruddesher sango ne. Dik haarano duhsahose sakol bnaadhon poruk khose, Kiser baadha gharer koner shaasansima-langhane. Bedona tor bijulshikha jaluk antore. Sarbonasher koris saadhon bajromantore. Ajanate korbi gaahon, jhar se pather habe baahon - Shesh kore dis aaponare tui proloy raater krandone.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रकृति · 57(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- बोर्श(বোর্শ)
- राग
- बौल्-सुर(বাউল-সুর)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- ऋतु
- बरसात(বর্ষা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ३१(স্বরবিতান ৩১)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1923(১৩৩০)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।