गीत / Prakriti

শরতে আজ কোন্‌ অতিথি এল (প্রভাতে আজ)

Prakriti
शरते आज कोन् अतिथि एल प्राणेर द्वारे।

आनन्दगान गा रे हृदय़,   आनन्दगान गा रे॥

    नील आकाशेर नीरव कथा
शिशिर-भेजा व्याकुलता

       वेजे उठुक
आजि तोमार वीणार तारे तारे॥

शस्यक्षेतेर सोनार गाने   योग दे रे आज समान ताने,

भासिय़े दे सुर भरा नदीर अमल जलाधारे।

   ये एसेछे ताहार मुखे   देख् रे
चेय़े गभीर सुखे,

       दुय़ार खुले
ताहार साथे वाहिर हय़े या रे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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