प्राण चाय़ चक्षु ना चाय़
Pran chay chokkhu na
प्रेम
प्राण चाय़ चक्षु ना
चाय़, मरि एकि तोर दुस्तरलज्जा।
सुन्दर एसे फिरे याय़,
तवे कार लागि मिथ्या ए सज्जा॥
मुखे नाहि निःसरे
भाष, दहे अन्तरे निर्वाक् वह्नि
।
ओष्ठे की निष्ठुर
हास, तव
मर्मे ये त्रन्दन तन्वी!
माल्य ये दंशिछे
हाय़, तव शय्या ये कन्टकशय्या–
मिलनसमुद्रवेलाय़ चिर- विच्छेदजर्जर मज्जा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Praan chaay chokkhu na chaay, mori eki tor dustarolajja. Sundaro ese phire jaay, tobe kaar laagi miththa e sajja. Mukhe naahi nihsare bhaas, dahe antare nirbaako bohni. Ostthe ki nistthuro haas, tabo marme je krandano tonni ! Mallo je dongsichhe haay, tabo sajja je kantakoshajja Milanosumudrobelay chiro - bichchhedojarjaro majja.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1914(১৩২১)
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