प्रेमे प्राणे गाने गन्धे आलोके पुलके
Preme prane gane gondhe
पूजा
३१६
प्रेमे प्राणे गाने गन्धे आलोके पुलके
प्लावित
करिय़ा निखिल द्युलोके भूलोके
तोमार अमल अमृत पड़िछे झरिय़ा॥
दिके दिके
आजि टुटिय़ा सकल वन्ध
मुरति
धरिय़ा जागिय़ा उठे आनन्द,
जीवन उठिल निविड़ सुधाय़ भरिय़ा॥
चेतना आमार
कल्याणरससरसे
शतदलसम
फुटिल परम हरषे
सव मधु तार चरणे तोमार धरिय़ा।
नीरव आलोके
जागिल हृदय़प्रान्ते
उदार उषार
उदय़-अरुणकान्ति,
अलस आँखिर आवरण गेल सरिय़ा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Preme praane gaane gandhe aaloke pulake Plabito koriya nikhil dyuloke-bhuloke Tomaro amal amrito porichhe jhoriya. Dike dike aaji tutiya sakolo bandho Muroti dhoriya jaagiya utthe anondo, Jibano utthilo nibiro sudhay bhoriya. Chetona aamar kalyano-raso-sarase Shatodalosamo phutilo paromo haroshe Sabo modhu taar charone tomar dhoriya. Nirabo aaloke jaagilo hridoyopraante Udaar ushaar udayo-oruno kaanti, Aloso aankhiro aaborano gelo soriya.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 / कांगालिचरण सेन / भीमराव शास्त्री - रचनाकाल
- November 1907(অগ্রহায়ণ ১৩১৪)
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