राङा-पद-पद्मयुगे प्रणमि गो भवदारा !
Rangapadopadmojuge pronomi
वाल्मीकि प्रतिभा Valmiki Pratibha से · दृश्य 2
राङा-पद-पद्मयुगे प्रणमि गो भवदारा ! आजि ए घोर निशीथे पूजिव तोमारे तारा ! सुरनर थरथर— व्रह्माण्ड विप्लव करो, रणरङ्गे मातो मा गो, घोर उन्मादिनी पारा । झलसिय়े दिशि दिशि, घुराओ तड়िৎ असि, छुटाओ शोणितस्रोत, भासाओ विपुल धरा । उरो काली कपालिनी, महाकालसीमन्तिनी, लहो जवापुष्पाञ्जलि महादेवी पराৎपरा !
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Raangapado-padmojuge pronomi go bhabodara! Aaji e ghor nisheethe pujibo tomare taara. Suronaro tharoharo- bramhandobiplab karo, Ranarange maato maa go, ghora unmadinee-paara. Jhalasiye dishi dishi ghurao torito-asi, Chhutao shonitosroto, bhaasao bipul dhara. Uro kaalee kapalinee, mahakaalseemantinee, Laho jabapuspaanjali mahadebi paratpara.
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- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
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