सकल भय़ेर भय़ ये तारे
Sakal bhoyer bhoy je
पूजा
४८६
सकल भय़ेर भय़ ये तारे कोन् विपदे काड़वे?
प्राणेर सङ्गे ये प्राण गाँथा कोन् काले से छाड़वे॥
नाहय़ गेल सवइ
भेसे, रइवे तो सेइ सर्वनेशे,
ये लाभ सकल क्षतिर शेषे से लाभ केवल वाड़वे॥
सुख निय़े, भाइ, भय़े
थाकि, आछे आछे देय़ से फाँकि–
दुःखे ये सुख थाके वाकि केइ वा से सुख नाड़वे?
ये पड़ेछे पड़ार
शेषे ठाँइ पेय़ेछे तलाय़
एसे,
भय़ मिटेछे, वेँचेछे से–तारे के आर पाड़वे?। यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sakol bhoyer bhoy je taare kon bipade kaarbe? Praaner sange je praan gnaatha kon kaale se chhaarbe? Naahay gelo sabi bhese roibe to sei sarboneshe, Je lobhe sakol khotir seshe se laabh kebol baarbe. Sukh niye, bhaai, bhaye thaaki, aachhe aachhe dey se phnaaki, Dukhe je sukh thaake baaki kei ba se sukh naarbe? Je porechhe paraar sheshe tthai peyechhe talaay ese, Bhoy mitechhe bnechechhe se taare ke aar paarbe?
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1909(১৩১৬)
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