सकरुण वेणु वाजाय़े के याय़
Sakaruno benu bajaye
प्रेम
सकरुण वेणु वाजाय़े के याय़ विदेशी नाय़े,
ताहारि रागिणी लागिल गाय़े॥
से सुर वाहिय़ा भेसे आसे कार सुदूर विरहविधुर हिय़ार
अजाना वेदना, सागरवेलार अधीर वाय़े
वनेर छाय़े॥
ताइ शुने आजि विजन प्रवासे हृदय़माझे
शरৎशिशिरे भिजे भैरवी नीरवे
वाजे।
छवि मने आने आलोते ओ गीते–येन जनहीन नदीपथटिते
के चलेछे जले कलस भरिते अलस पाय़े
वनेर छाय़े॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sakoruno benu baajaye ke jaay bideshi naaye, Taahari raagini laagilo gaaye. Se sur baahiya bhese aase kaar sudur birahobidhur hiyar Ajana bedona, saagorbelar adhir baaye Bonero chhaaye. Taai sune aaji bijano probase hridoyomaajhe Sharotoshishire bhije bhairobi nirabe baaje. Chhobi mone aane aalote o gite - jeno janohin nodipathotite Ke cholechhe jale kalos bhorite alos paaye Bonero chhaaye.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 249(প্রেম)
- उप-पर्याय
- प्रेम्-बोइचित्र(প্রেম্-বোইচিত্র)
- राग
- भैरवि(ভৈরবী)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- स्थान
- मयार जहाज, जावा से पेनांग की यात्रा के दौरान(মায়ার জাহাজ, জাভা থেকে পেনাং-এর যাত্রাপথে)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन १३(স্বরবিতান ১৩)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 18 September 1927(২ আশ্বিন ১৩৩৪)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।