संसार यवे मन केड़े लय़
Sangsar jabe mon kere
पूजा
४७९
संसार यवे मन केड़े लय़, जागे ना यखन प्राण,
तखनो, हे
नाथ, प्रणमि तोमाय़ गाहि वसे तव गान॥
अन्तरयामी, क्षमो से
आमार शून्य मनेर वृथा उपहार–
पुष्पविहीन
पूजा-आय़ोजन, भक्तिविहीन तान॥
डाकि तव
नाम शुष्क कण्ठे, आशा करि प्राणपणे–
निविड़
प्रेमेर सरस वरषा यदि नेमे आसे मने।
सहसा एकदा आपना हइते भरि दिवे
तुमि तोमार अमृते,
एइ भरसाय़
करि पदतले शून्य हृदय़ दान॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sangsar jabe mon kere loy, jaage na jakhon praan, Takhon hey naath, pronomi tomay gaahi bose tabo gaan. Antarjaami, khamo se aamar sunno moner britha upohaar - Pushpobihin puja ayojan, bhaktibihin taan. Daaki tabo naam shushko kanthe, aasha kori praanpane - Nibir premer saros barosha jodi neme aase mone. Sahosa ekoda aapona hoite bhori dibe tumi tomar amrite, Ei bharosay kori padotale sunno hridoy daan.
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- कांगालिचरण सेन / दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1901(১৩০৮)
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