गीत / प्रकृति

सेइ तो वसन्त फिरे एल (हाय़ रे सेइ तो वसन्त फिरे एल)

sei to vasanta phire ela haya re sei to vasanta phire ela

प्रकृति
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सेइ तो वसन्त फिरे
एल,   हृदय़ेर वसन्त कोथाय़   हाय़ रे।

 सव मरुमय़,   मलय़-अनिल
एसे   केँदे शेषे   फिरे चले
याय़   हाय़ रे॥

      कत शत फुल छिल
हृदय़े,   झरे गेल,   आशालता शुकालो,

पाखिगुलि दिके दिके चले याय़।

शुकानो पाताय़ ढाकावसन्तेर मृतकाय़,

प्राण करे हाय़-हाय़   हाय़ रे॥

फुराइल सकलइ।

      प्रभातेर मृदु
हासि,   फुलेर रूपराशि,   फिरिवे कि
आर।

किवा जोछना फुटित रे   किवा यामिनी–

 सकलइ हारालो,   सकलइ गेल रे
चलिय़ा,   प्राण करे हाय़ हाय़   हाय़
रे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।