शिउलि फुल, शिउलि फुल
Shiuli phul shiuli phul
प्रकृति
शिउलि फुल, शिउलि
फुल, केमन
भुल, एमन भुल॥
रातेर वाय़ कोन्
माय़ाय़ आनिल हाय़ वनछाय़ाय़,
भोरवेलाय़ वारे वारेइ फिरिवारे
हलि व्याकुल॥
केन रे तुइ उन्मना! नय़ने तोर हिमकणा।
कोन् भाषाय़ चास विदाय़, गन्ध
तोर की जानाय़–
सङ्गे हाय़ पले
पलेइ दले दले याय़ वकुल॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shiuli phul, shiuli phul, kemon bhul, emon bhul. Raater baay kon maayay aanilo haay bonochhaayay, Bhorbelaay baare baarei phiribaare holi byakul. Keno re tui unmona! Nayone tor himkona. Kon bhaasay chaas biday, gandho tor ki janay - Songe haay pale palei dale dale jaay bokul.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 5 March 1930(২১ ফাল্গুন ১৩৩৬)
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