शुष्कतापेर दैत्यपुरे
Shuskotaper doityopure
प्रकृति
शुष्कतापेर दैत्यपुरे
द्वार भाङवे व’ले,
राजपुत्र,
कोथा हते हठाৎ एले चले॥
सात समुद्र- पारेर थेके वज्रस्वरे एले
हेँके,
दुन्दुभि ये उठल वेजे
विषम कलरोले॥
वीरेर पदपरश पेय़े
मूर्छा हते जागे,
वसुन्धरार तप्त
प्राणे विपुल पुलक लागे।
मरकतमणिर थाला साजिय़े गाँथे वरणमाला,
उतला तार हिय़ा आजि
सजल हाओय़ाय़ दोले॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shuskotaaper daityapure dwaar bhaangbe bole, Raajputro kotha hote hatthat ele chole. Saat Samudra paarer theke bajrasware ele hence, Dundubhi je uthlo beje bisam kalorole. Birer padoparos peye murchha hote jaage, Basundharar tapto praane bipul pulak laage. Marakatomonir thaala sajiye gnaathe baronomaala Utala taar hiya aaji sajal haaway dole.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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