सव दिवि के सव दिवि पाय़
Sab dibi ke sab dibi
प्रकृति Basanta से
वसन्तेर परिचरगण - सव दिवि के, सव दिवि पाय়, आय় आय় आय় । डाक पड়ेछे ओइ शोना याय়, आय় आय় आय় । आसवे-ये से स्वर्णरथे, जागवि कारा रिक्त पथे पौषरजनी ताहार आशाय় । आय় आय় आय় । क्षणेक केवल ताहार खेला, हाय় हाय় हाय় । तार परे तार यावार वेला, हाय় हाय় हाय় । चले गेले जागवि यवे धनरतन वोझा हवे, वहन करा हवे-ये दाय় । हाय় हाय় हाय় ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sab dibi ke sab dibi paay, aay aay aay. Daak porechhe oi shona jaay, aay aay aay. Aasbe se je swarnorathe - jaagbi kaara rikto pathe Pous-rajoni taahar aashay, aay aay aay. Khonek kebol taahar khela, haay haay haay. Taar pore taar jaabar bela, haay haay haay. Chole gele jaagbi jabe dhonraton bojha hobe, Bahon kora hobe-je daay, haay haay haay.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 9 February 1923(২৭ মাঘ ১৩২৯)
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