सखी, प्रतिदिन हाय़ एसे फिरे याय़ के
Sokhi protidin hay 2
प्रेम
सखी, प्रतिदिन हाय़ एसे फिरे याय़ के। तारे आमार माथार एकटि कुसुम दे॥ यदि शुधाय़ के दिल कोन् फुलकानने, मोर शपथ, आमार नामटि वलिस ने॥ सखी, से आसि धुलाय़ वसे ये तरुर तले सेथा आसन विछाय़े राखिस वकुलदले। से ये करुणा जागाय़ सकरुण नय़ने– येन की वलिते चाय़, ना वलिय़ा याय़ से॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sokhi, protidin haay ese phire jaay ke. Taare aamar maathar ekti kusum de. Jodi shudhay ke dilo, kon phoolokaanone, Mor shapath, aamar naamti bolis ne. Sokhi, se aasi dhulay base je torur tole Setha aason-bichaaye raakhis bakulodale. Se je koruna jaagay sakoruno nayone - Jeno kee bolite chaay, na boliya jaay se.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1897(১৩০৪)
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