সখী, সে গেল কোথায়
Sokhi se gelo kothay
Mayar Khela Mayar Khela से · दृश्य 3
सखी, से
गेल कोथाय़, तारे डेके
निय़े आय़।
दाँड़ाव
घिरे तारे तरुतलाय़॥
आजि ए मधुर
साँझे कानने फुलेर माझे
हेसे हेसे
वेड़ावे से, देखिव ताय़॥
अकाशे तारा
फुटेछे, दखिने वातास छुटेछे,
पाखिटि
घुमघोरे गेय़े उठेछे।
आय़ लो आनन्दमय़ी, मधुर वसन्त लय़े
लावण्य फुटावि लो, तरुलताय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sokhi se gelo kothaay, taare deke niye aay. Dnaarabo ghire taare, torutalay. Aaji e modhur saaje, kaanone phuler maajhe Hese hese berabe se, dekhibo taay. Aakasher taara phutechhe, dokhine baatas chutechhe Paakhiti ghumoghore, geye utthechhe. Aay lo aanondomoyi modhur basonto loye, Labonno phutabi lo torulatay.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Mayar Khela(মায়ার খেলা)
- उप-पर्याय
- Prem-Boichitra
- राग
- Behag(বেহাগ)
- ताल
- Dadra(দাদরা)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Maayar Khela
- स्वरबितान खण्ड
- 48 (Maayar Khela)
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani
- रचनाकाल
- 1883(১২৯০)
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