সুমঙ্গলী বধূ, সঞ্চিত রেখো প্রাণে স্নেহমধু
Sumangali bodhu sanchito
Aanushthanik Sangeet
११
सुमङ्गली वधू, सञ्चित रेखो प्राणे स्नेहमधु। आहा।
सत्य रहो तुमि प्रेमे, ध्रुव रहो क्षेमे–
दुःखे सुखे शान्त रहो हास्यमुखे।
आघाते हओ जय़ी अविचल धैर्ये कल्याणमय़ी। आहा॥
चलो शुभवुद्धिर वाणी शुने,
सकरुण नम्रतागुणे चारि दिके शान्ति होक विस्तार–
क्षमास्निग्ध करो तव संसार।
येन उपकरणेर गर्व आत्मारे ना करे खर्व।
मन येन जाने, उपहास करे काल धनमाने–
तव चक्षे येन धूलिर
से फाँकि नित्येरे ना देय़ ढाकि। आहा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sumongolee bodhu, sonchito rekho praane snhehamodhu. Aaha. Sotya raho tumi preme, dhruba raho ksheme – Dukhhe sukhe shaanto raho haasyomukhe. Aaghate hawo joyee abichal dhoirjye kolyanamoyee. Aaha. Chalo shubhabuddhir baanee shune, Sakarun namratagune chaari dike shaanti hok bistar – Khamasnigdha karo tabo songsar. Jeno upakaroner garbo aatmare na kare kharbo. Mon jeno jaane, upahas kare kaal dhonomaane – Tabo chokhhe jeno dhoolir se phanki nityere na deay dhaaki. Aaha.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Aanushthanik Sangeet · 11(আনুষ্ঠানিক সঙ্গীত)
- राग
- Bhairavi(ভৈরবী)
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- घराना
- Hindustani
- स्थान
- Shantiniketan, Uttarayan
- स्वरबितान खण्ड
- 55
- स्वरलिपि
- Shantideb Ghosh
- रचनाकाल
- 30 December 1939(১৫ পৌষ ১৩৪৬)
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