তপস্বিনী হে ধরণী
Tapaswini he dharani
Prakriti
तपस्विनी हे धरणी,
ओइ-ये तापेर वेला आसे–
तपेर
आसनखानि प्रसारिल मौन नीलाकाशे॥
अन्तरे प्राणेर लीला होक तव अन्त:शीला,
यौवनेर परिसर शीर्ण होक होमाग्निनिश्वासे॥
ये तव विचित्रतान
उच्छसि उठित वहु गीते
एक हय़े मिशे याक
मौनमन्त्रे ध्यानेर शान्तिते।
संयमे वाँधुक लता कुसुमित चञ्चलता,
साजुक लावण्यलक्ष्मी दैन्येर धुसर
धुलिवासे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Taposwini hey dharoni, oi je taaper bela aase – Toper aasonokhani prosaarilo mouna nilaakashe. Antare praaner lila hok tobe antashila, Joubaner porisar shirna hok homagni-nishwase. Je tabo bichitra taan uchchhosi uthito bahu gite Ek hoye mishe jaak mounomantre dhyaner shantite. Sangjame bnadhuk lata kusumito chanchalota, Saajuk labanya-lokkhi dainyer dhusar dhulibaase.
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- पर्याय
- Prakriti · 24(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- Grisma
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- Dadra(দাদরা)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Grishma(গ্রীষ্ম)
- प्रकाशित
- Probasi
- स्वरबितान खण्ड
- 3
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore
- रचनाकाल
- 1926(১৩৩৩)
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