तोमार आसन पातव कोथाय़
Tomar asan patbo
प्रकृति
तोमार आसन पातव कोथाय़ हे अतिथि।
छेय़े गेछे
शुकनो पाताय़ काननवीथि॥
छिल फुटे मालतीफुल कुन्दकलि,
उत्तरवाय़
लुठ करे ताय़ गेल चलि–
हिमे विवश वनस्थली विरलगीति
हे अतिथि॥
सुर-भोला
ओइ धरार वाँशि लुटाय़ भुँय़े,
मर्मे ताहार तोमार हासि दाओ ना छुँय़े।
मातवे आकाश
नवीन रङेर ताने ताने,
पलाश वकुल व्याकुल हवे आत्मदाने–
जागवे वनेर मुग्ध मने मधुर स्मृति
हे अतिथि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Tomar aason paatbo kothay hey otithi. Chheye gechhe sukno paatay kanonobithi. Chhilo phute malotiphul kundokoli, Uttarobaay luth kore taay gelo choli- Hime bibaso bonosthali biralogiti Hey otithi. Sur-bhola oi dharar bnaasi lutaay bhnue, Marme taahar tomaro haasi daao naa chhnuye. Maatbe aakash nobino ranger taane taane, Palaas bakul byakul habe aatmodaane- Jaagbe boner mugdho mone modhur smriti Hey otithi.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 2 March 1927(১৮ ফাল্গুন ১৩৩৩)
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