आरो आघात सइवे आमार
Aro aghat soibe amar
पूजा
२२४
आरो आघात सइवे आमार, सइवे आमारो।
आरो कठिन सुरे जीवन-तारे झङ्कारो॥
ये राग जागाओ आमार प्राणे वाजे नि ता चरम ताने,
निठुर मूर्छनाय़ से गाने मूर्ति सञ्चारो॥
लागे ना गो केवल येन कोमल करुणा,
मृदु सुरेर खेलाय़ ए प्राण व्यर्थ कोरो ना।
ज्व’ले उठुक सकल हुताश, गर्जि उठुक सकल वातास,
जागिय़े दिय़े सकल आकाश पूर्णता विस्तारो॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaro aaghat soibe aamar, soibe aamaro. Aaro kotthin sure jiban-tare jhankaro. Je raag jaagao aamar praane baaje ni ta charom taane, Nitthur murchonay se gaane murti sancharo. Laage na go kebal jeno komal koruna, Mridu surer khelay e praan byartho koro na. Jwole utthuk sakol hutash, gorji utthuk sakol baatas, Jaagiye diye sakol aakash purnota bistaro.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 18 June 1910(৪ আষাঢ় ১৩১৭)
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